भारत के प्रमुख मजदूर आंदोलन

भारत में मजदूर आंदोलन के संकेत सर्वप्रथम सन् 1870 ईसवी से दिल्ली शुरू हो गए 1870 ईसवी में बंगाल के शशिपद बनर्जी ने मजदूरों के लिए एक क्लब स्थापित किया और भारत श्रमजीवी नामक पत्रिका का प्रकाशन किया अपने लिए जो के खिलाफ हड़ताल के रूप में मजदूरों की कार्यवाही का पहला उल्लेख 1877 ईसवी में मिलता है जब मजदूरों ने  नागपुर की एंप्रेस मिल में अपने वेतन की दरों को लेकर हड़ताल की थी।

सन 1878 ईस्वी में सोराबजी सपूर्जी बंगाली ने  मुंबई विधान परिषद में मजदूरों के काम के घंटे कम करने के लिए एक बिल पास करने की कोशिश की.

सन 1890 ईसवी में एनएम लोखंडे ने मुंबई मेल हैंड्स एसोसिएशन की स्थापना की किसे भारत का पहला मजदूर संगठन माना गया शुरुआत में राष्ट्रवादी नेताओं का रुख मजदूर आंदोलन के प्रति सकारात्मक नहीं था.

भारत में प्रथम फैक्ट्री आयोग की स्थापना

भारत में प्रथम फैक्ट्री आयोग मुंबई में सन 1875 ईसवी में स्थापित किया गया यह आयोग लंका शायर के उद्योगपतियों की मांग पर स्थापित किया गया जिसका मकसद भारतीय कारखानों में मजदूरों के काम करने की परिस्थितियों का अध्ययन करना था इसके बाद 1881 ईसवी में प्रथम फैक्ट्री एक्ट बिल पास हुआ बीपी वाडिया द्वारा द्वारा स्थापित मद्रास मजदूर संघ भारत का पहला आधुनिक मजदूर संघ था जिसकी स्थापना 1918 में हुई.

अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी)

अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना भारत में प्रभावी मजदूर संघ आंदोलन के युग की शुरुआत का परिचायक है क्योंकि इस संगठन में पहले के छोटे-मोटे प्रयासों को एक संगठित रूप प्रदान किया अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन की स्थापना का एक पक्ष अंतरराष्ट्रीय श्रम संघ अर्थात (आईएलओ), इसकी स्थापना 1919 ईस्वी में हुई.

तत्कालीन भारत सरकार ने 1919 के अंतर्राष्ट्रीय श्रम संघ के वाशिंगटन सम्मेलन में बीपी वाडिया को भारत का मजदूरों का प्रतिनिधि बनाया गया 1920 में एनएम जोशी लाला लाजपत राय एवं जोसेप बैपटिस्टा आदि के अथक प्रयासों से अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) की स्थापना हुई सन 1929 में पूरे विश्व में व्याप्त मंदी के कारण भारतीय ट्रेड यूनियन में काफी उतार-चढ़ाव आए 1929 में नागपुर अधिवेशन में जब श्री जवाहरलाल नेहरू ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के अध्यक्ष थे तू इस यूनियन का दो भागों में विभाजन हो गया जिसका मुख्य मुद्दा था एटक अंग्रेजों द्वारा नियुक्त रॉयल कमीशन ऑन लेबर का बहिष्कार करेगी अथवा नहीं इसमें उदारवादी नेता सम्मिलित होना चाहते थे जबकि उग्रवादी नेता इसका बहिष्कार करना चाहते थे अंततः उदारवादी नेताओं ने ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस से नाता तोड़ लिया तथा वीवी गिरि की अध्यक्षता में इंडियन ट्रेड यूनियन फेडरेशन का गठन किया गया जिसका बाद में नाम बदलकर के नेशनल ट्रेड यूनियन फेडरेशन कर दिया गया.

1931 में इसका दूसरी बार विभाजन हुआ इस बार साम्यवादी नेताओं ने एटक को छोड़ दिया और रेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस का गठन किया यह घटना तब हुई जब कारखाना मालिकों ने हजारों की संख्या में श्रमिकों को नौकरी से हटा दिया और उनको बेघर कर दिया रेन ट्रेड यूनियन के प्रमुख नेता श्री देशपांडे, बंकिमचंद्र मुखर्जी,श्री रणदेव तथा भूपेंद्रनाथ दत्त आदि थे

भारत में श्रम शाही आयोग का गठन

अंग्रेज अधिकारी जॉन हेनरी ह्विटले की अध्यक्षता में 1929 ईस्वी में शाही श्रम आयोग का गठन किया गया और इसे भारतीय उद्योग धंधे तथा बागानों में श्रमिकों की वर्तमान स्थिति की जांच करने का कार्य सौंपा गया इस आयोग में कुल सदस्यों की संख्या ग्यारह थी. इन 11 सदस्यों में 6 सदस्य भारतीय थे शेष सदस्य अंग्रेज थे.

भारत में प्रमुख मजदूर हड़ताल

  • सन 1877 ईसवी में नागपुर की एंप्रेस मिल में मजदूर हड़ताल
  • 1895 ईसवी में अहमदाबाद मिल मालिक संघ के खिलाफ कपड़ा बुनकरों की हड़ताल.
  • 1895 ईस्वी में बजबज जूट मिल के मजदूरों की हड़ताल.
  • सन 1899 ईसवी में ग्रेट इंडिया पेनिनसुलर रेलवे में हड़ताल यह भारत की पहली संगठित एकीकृत हड़ताल थी
  • 22 जुलाई 1908 ईस्वी में मुंबई के कपड़ा मिल मजदूरों ने बाल गंगाधर तिलक को दिए गए कठोर कारावास दंड के विरोध में हड़ताल की गई यह भारत की मजदूरों की पहली राजनीतिक हड़ताल थी
  • सन 1918 ईस्वी में मुंबई में कपड़ा मिल में हड़ताल हुई जिसमें 125000 मजदूर हड़ताल में शामिल थे
  • सन 1922 ईसवी में टाटा आयरन एंड स्टील प्लांट जमशेदपुर कि मिलने हड़ताल हुई
  • सन 1922 ईस्वी में गुजरात के सूरत की कपड़ा मिल में हड़ताल.
  • 1924 ईस्वी में मुंबई की मुंबई टेक्सटाइल मिल में मजदूरों की हड़ताल
  • 1928 ईस्वी में भारत के इतिहास की सबसे बड़ी हड़ताल टेक्सटाइल मिल में हुई और यह हड़ताल लगभग 6 महीने तक चली
  • 1929 ईस्वी में बंगाल के जूता फैक्ट्रीयों में कार्य करने वाले श्रमिकों द्वारा पटसन कारखानों की प्रथम हड़ताल की
  • 2 अक्टूबर 1939 को द्वितीय विश्वयुद्ध के विरोध में हड़ताल हुई
  • 1946 में नौसेना विद्रोह के समय ही एक और मजदूर हड़ताल हुई.

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