भारत के वायसराय तथा उनके द्वारा किए गए कार्य

ईस्ट इंडिया कंपनी ने 18 57 की क्रांति के बाद भारत में द्वैध शासन प्रणाली अपनाई तथा 57 की क्रांति के बाद ब्रिटिश सरकार ने भारत में शासन पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए द्वैध शासन पद्धति के लिए दो शासक नियुक्त किए इसमें पहला था वायसराय तथा गवर्नर जनरल

गवर्नर जनरल ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन कार्य करता था तथा वायसराय महारानी का कार्य करता था

भारत के प्रमुख वायसराय क्रमशः उल्लेख किया जा रहा है

लॉर्ड कैनिंग (1856 से 1862 तक)

लॉर्ड कैनिंग ईस्ट इंडिया कंपनी का अंतिम गवर्नर जनरल तथा सम्राट के अधीन भारत का प्रथम वायसराय था  इसके समय कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुई जिसमें 18 57 की क्रांति का विद्रोह एक महत्वपूर्ण घटना थी 1861 में प्रसिद्ध भारतीय काउंसिल अधिनियम पारित हुआ इस बार काउंसिल अधिनियम के द्वारा प्रेसिडेंटियों में विधान मंडलों को स्थापित करना तथा वायसराय की प्रबंध कारिणी काउंसिल में वैधानिक कार्यों के लिए अधिक सदस्यों को ले जाने का उपबंध किया जाना था लॉर्ड कैनिंग के काल में ही आगरा बिहार मध्य प्रांत में 1859 ईसवी में किराया अधिनियम पारित हुआ तथा अधिकृत हाईकोर्ट स्थापना भी लॉर्ड कैनिंग के समय में 1861 में हुई सैनिक सुधार के अंतर्गत भारतीय सैनिकों की संख्या गाते हुए तूफानों से भारतीय सैनिकों के अधिकार समाप्त कर दिए गए।

1858 ईसवी में महारानी विक्टोरिया ने लॉर्ड कैनिंग के काल में ही घोषणा की कि भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन की समाप्ति की जाती है 1854 ईसवी में गुरद्वारा प्रेषित पत्र की सिफारिशों के अनुसार लंदन विश्वविद्यालय के आदर्श पर मुंबई कोलकाता तथा मद्रास में विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई।

आर्थिक सुधारों के अंतर्गत लॉर्ड कैनिंग ने अर्थशास्त्री विल्सन को भारत में बुलाया तथा ₹500 से अधिक आय पर इनकम टैक्स लगा दिया विधवा पुनर्विवाह अधिनियम-1856 तथा भारतीय दंड संहिता की स्थापना भी लॉर्ड कैनिंग के समय में 1861 ईसवी में की गई लॉर्ड कैनिंग के समय में नमक पर भी टैक्स लगाने का सुझाव दिया गया। लैंग तथा विल्सन के सुधारों का परिणाम यह हुआ क्योंकि अवकेनिंग भारत से सेवानिवृत्त होकर रवाना होने लगा तब घाटे का कोई बजट नहीं था।

लॉर्ड एल्गिन (1862-63)

1862 ईसवी में लॉर्ड कैनिंग के बाद लॉर्ड एल्गिन वायसराय बनकर आया भारत में आने से पहले हुए हैं जमैका और कनाडा के गवर्नर के रूप में कार्य कर चुका था लॉर्ड एल्गिन के कार्यकाल में पहाड़ियों का विद्रोह हुआ था और लॉर्ड एलगिन इस विद्रोह को दबाने में सफल रहा लॉर्ड एल्गिन ने सर्वोच्च एवं सदर न्यायालयों को उच्च न्यायालय के साथ मिला दिया लॉर्ड एल्गिन ने कानपुर आगरा अंबाला तथा बनारस में अपने दरबार लगाए इनके इन दरबारों का मुख्य उद्देश्य भारतीय रियासतों को ब्रिटिश सरकार के करीब लाना था लॉर्ड एल्गिन की मृत्यु तत्कालीन पंजाब के धर्मशाला में 1863 ईसवी में हो गई।

सर जॉन लॉरेंस (1864-69)

सर्जन लॉरेंस को भारत का रक्षा की तथा विजय का संचालक कहा जाता है पंजाब के अंग्रेजी राज्य में मिलाए जाने के बाद वह चीफ कमिश्नर नियुक्त किया गया अफगानिस्तान के बारे में उसने हस्तक्षेप की नीति का अनुपालन किया तथा तत्कालीन अफगानी शासक शेर अली से मित्रता कर ली 1865 ईसवी में भूटानी यों ने ब्रिटिश साम्राज्य पर हमला कर दिया प्रारंभ में अंग्रेज भूटानी उसे पराजित हुए बाद में अंग्रेजी अपनी स्थिति को सुधारने में तथा भूटानी को जीत जीतने में सफल हुए भूटानी हो तथा अंग्रेजों के मध्य  संधि हुई जिसमें भूटानी होने दो बार जाति के लोगों को अंग्रेजों के हवाले कर दिया तथा उन्हें वार्षिक सहायता प्राप्त करने का भी निश्चित हो गया सर्ज्ञान लॉरेंस के कार्यकाल में सन 1866 ईसवी में उड़ीसा में 1968-69 ईसवी में बुंदेलखंड तथा राजपूताना में भयंकर अकाल पड़ा सर्ज्ञान कैंपबेल के नेतृत्व में अकाल आयोग का गठन किया गया सरकार को ऐसा प्रयत्न करना था जिससे भुखमरी से होने वाली मृत्यु को कम किया जा सके तथा लोगों को बचाया जा सके 1865 ईस्वी में भारत तथा यूरोप के बीच प्रमुख समुद्री टेलीग्राफ सेवा की शुरुआत हुई और 1868 ईस्वी में अभद्रता पंजाब के काश्तकारी अधिनियम पास हुए।

लॉर्ड मेयो (1869-72)

1869 ईस्वी में लॉर्ड मेयो को सर जॉन लॉरेंस के स्थान पर भारत का वायसराय बनाकर भेजा अफगानिस्तान के संबंध में सर जॉन लॉरेंस ने जो नीति अपनाई थी उसका लॉर्ड मेयो ने समर्थन किया लॉर्ड मेयो ने भारत में वित्त के विकेंद्रीकरण को आरंभ किया लॉर्ड मेयो ने बजट घाटे को कम किया तथा इनकम टैक्स की दर को एक फ़ीसदी से बढ़ाकर ढाई फ़ीसदी तक कर दिया 1870 ईसवी में लॉर्ड मेयो के काल में लाल सागर से होकर तार की संख्या व्यवस्था का प्रारंभ हुआ तथा 1872 ईसवी में नदियों के कार्यकाल में प्रायोगिक जनगणना की शुरुआत हुई ।

अट्ठारह सौ बहत्तर ईसवी में लॉर्ड मेयो ने कृषि विभाग की स्थापना की तथा महारानी विक्टोरिया के दूसरे पुत्र ड्यूक ऑफ़ एडिनबरा ने 1869 में भारत की यात्रा की तथा राज्य रेलवे की स्थापना भी लॉर्ड मेयो के काल में हुई लॉर्ड लियोने भारतीय शासकों के बच्चों की शिक्षा के लिए अजमेर में मेयो कॉलेज की स्थापना की गई तथा अंडमान द्वीप में 1872 ईसवी में एक पागल पठान ने लॉर्ड मेयो की निर्मम हत्या कर दी।

लॉर्ड नॉर्थब्रुक (1872-76)

1872 में लॉर्ड मेयो के स्थान पर लॉर्ड नॉर्थब्रुक को भारत का वायसराय बनाया गया उसने 1873 ईस्वी में अफगानिस्तान के राजदूतों से बातचीत की और स्वयं की ओर से कोई भी आश्वासन देने से मना कर दिया 1807 ईस्वी में लॉर्ड नॉर्थब्रुक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया क्योंकि अफगानिस्तान की नीति के संबंध में लॉर्ड नॉर्थब्रुक के विचार डिजरेली की सरकार से नहीं मिलते थे पंजाब का कूका आंदोलन लॉर्ड नार्थ बुक के कार्यकाल में हुआ तथा उनके कार्यकाल में 1873 ईस्वी में बंगाल तथा बिहार में भीषण अकाल पड़ा अकाल पीड़ित लोगों के लिए लॉर्ड नॉर्थब्रुक ने बहुत सारा पैसा खर्च किया इसी के कार्यकाल में सन 1875 ईसवी में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में सैयद अहमद खान द्वारा मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना की गई जिसमें नॉर्थब्रुक ने सहायता राशि दी नार्थ ग्रुप के शासनकाल में किंग एडवर्ड सप्तम भारत आया बड़ौदा के राजा मल्हार राव गायकवाड को भ्रष्टाचार एवं कुशासन का आरोप लगाकर राज्य सिंहासन से अपदस्थ करके उसके भाई के दत्तक पुत्र को 1875 ईसवी में घोषित कर दिया।

लॉर्ड लिटन (1876-80)

लॉर्ड नॉर्थब्रुक के बाद लॉर्ड लिटन भारत का वायसराय बनकर आया। लॉर्ड लिटन भारतीय आंदोलनों की इस मनोवृति का विरोधी था जिसके अनुसार उन मामलों में जिनमें यूरोपीय अपराधी होते थे उनको साधारण दंड दिए जाते थे तथा भारतीय अपराधियों को कठोर दंड दिया जाता था लॉर्ड लिटन एक प्रतिभावान लेखक था साहित्य में लॉर्ड लिटन को ‘ओवन मैरिडिथ’ के नाम से जाना जाता है। लॉर्ड लिटन के कार्यकाल में प्रमुख घटनाएं हुई जो निम्नलिखित हैं

1876-78 ई. का भीषण अकाल हैदराबाद पंजाब बंद है भारत मैसूर मद्रास मुंबई मैं 1876 ईस्वी में भयंकर अकाल पड़ा जिस समय लगभग 5000000 से अधिक लोग बेमौत मारे गए लॉर्ड लिटन ने अकाल की जांच के लिए रिचर्ड स्ट्रेची की अध्यक्षता में एक आयोग की स्थापना की इस आयोग ने प्रत्येक प्रांत में आप अकाल राहत कोष स्थापित करने का प्रतिवेदन किया। 

दिल्ली दरबार का आयोजन– 

1 जनवरी 1877 ईस्वी को ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया को केसर ए हिंद की उपाधि से सम्मानित करने के लिए दिल्ली दरबार का आयोजन किया था उसी समय उपरोक्त स्थानों पर भयंकर अकाल पड़ा था।

राज उपाधि अधिनियम

1876 ईसवी में लॉर्ड लिटन के कार्यकाल में अंग्रेजी संसद ने ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया को केसर ए हिंद की उपाधि देने के लिए एक राज उपाधि अधिनियम को पास किया।

मुक्त व्यापार नीति

लॉर्ड लिटन ने मुक्त व्यापार की नीति का अनुसरण किया 29 वस्तुओं से लॉर्ड लिटन ने आयातक r98 जिसमें सूती कपड़े पर से 50% कर को कम कर दिया इसका परिणाम यह हुआ इस समुद्री व्यापार में तेजी से वृद्धि हुई।

आर्थिक विकेंद्रीकरण

आर्थिक विकेंद्रीकरण का कदम सबसे पहले लॉर्ड में उन्हें उठाया तथा लॉर्ड लिटन के समय में आर्थिक विकेंद्रीकरण की नीति का पालन होता रहा इस दिशा में एक और कदम उठाते हुए लॉर्ड लिटन ने प्रांतों को कुछ और विभाग से ऊपर तथा प्रांतों के लिए और आय के साधन भी दिए।

वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट (1878)

वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट 1878 ईस्वी में भारत में लागू किया गया जिसका उद्देश्य भारतीय भाषा के समाचार पत्रों पर प्रतिबंध लगाना था इतिहासकारों ने इस वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट 1878 को गला घोट अधिनियम का नाम दिया क्योंकि इन अखबारों में अंग्रेजी राज के खिलाफ कुछ भी नहीं छाप सकते थे अगर छापा जाता तो पूरी प्रेश को जब्त कर लिया जाता।

भारतीय शस्त्र अधिनियम (1878 ई.)

मार्च 1878 में लॉर्ड लिटन के समय में 11वीं अधिनियम से किसी भी भारतीयों को बिना लाइसेंस के स्वस्थ रखना गैरकानूनी घोषित कर दिया तथा वस्तुओं के व्यापार करने को एक दंडनीय अपराध मान लिया।

लॉर्ड रिपन (1880-84)

लॉर्ड रिपन भारत का सबसे लोकप्रिय गवर्नर जनरल रहा था लॉर्ड कर्जन तथा लॉर्ड लिटन से यह गवर्नर राजनीतिक एवं सामाजिक तथा व्यवहारिक दृष्टिकोण से बिल्कुल भिन्नता यह ग्लैडस्टन युग का सच्चा और उदार व्यक्तित्व रहा था। लॉर्ड रिपन के शासनकाल में भारत राजनीतिक धार्मिक तथा सामाजिक जागरण से गुजर रहा था वहीं दूसरी तरफ लिटन ने अपने कार्यों से भारतीय जनता नौटंकी अन्याय पूर्ण कार्यों से जनता व्याकुल थी 18192 लॉर्ड रिपन ने एक पुस्तक ‘इस युग का कर्तव्य’ के नाम से लिखी। लॉर्ड रिपन ने कहा था “मेरा मूल्यांकन मेरे कामों से करना मेरे शब्दों से नहीं” लॉर्ड रिपन के कार्यकाल को भारत का स्वर्ण युग का आरंभ कहा जाता है। फ्लोरेंस नाइटेंगल ने लॉर्ड रिपन को भारत का उदाहरण की संज्ञा दी थी। भारत में नियमित जनगणना की शुरुआत सन 1872 ईसवी से प्रारंभ हुई जबकि लॉर्ड मेयो के शासनकाल में भारत में जनगणना की शुरुआत हुई थी प्रथम वास्तविक जनगणना के शासनकाल में 1881 ईस्वी से प्रारंभ हुई। तब से भारत में नियमित रूप से प्रत्येक 10 वर्ष बाद भारत में नियमित रूप से जनगणना होती रही है। लार्ड रिपन के सुधार शासन कारणों में सबसे महत्वपूर्ण कार्य स्थानीय स्वशासन की शुरुआत थी स्थानीय स्वशासन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय बोर्ड गठित किए गए तथा जिले में जिला उप विभाग और तहसील बोर्ड बनाने की योजना बनाई गई नगर में नगर पालिका का गठन किया गया और इन्हें कार्य करने की स्वतंत्रता और राजस्व प्राप्ति के साधन उपलब्ध कराए गए। 

लॉर्ड रिपन के कार्यकाल में भारत में प्रथम फैक्ट्री अधिनियम पारित हुआ तथा वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट भी लॉर्ड रिपन ने अपने सुधार कार्यों के तहत सबसे पहले समाचार पत्रों की स्वतंत्रता को बहाल किया तथा एक 1882 ईसवी में वर्नाकुलर प्रेस एक्ट को समाप्त कर दिया गया।

इल्बर्ट बिल विवाद (1884) 1884 ईसवी में इल्बर्ट बिल विवाद उत्पन्न हुआ इल्बर्ट बिल भारत सरकार का एक विधि सदस्य था इल्बर्ट बिल विधेयक में फौजदारी दंड व्यवस्था में प्रचलित भेदभाव को समाप्त करने की अनुशंसा की गई तथा भारतीय न्यायाधीशों को अल्बर्ट विधेयक में यूरोपीय मुकदमों को सुनने का अधिकार प्रदान किया गया भारत में रहने वाले अंग्रेजों ने इस विधेयक पर आपत्ति जताई इस वजह से उनको इस विधेयक को वापस लेकर संशोधित करके उन्हें सदन में पेश करना पड़ा इसके बाद विवाद के कारण कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

लॉर्ड रिपन ने स्वतंत्र व्यापारिक नीति को पूरा किया इस नीति को लॉर्ड नॉर्थब्रुक तथा लॉर्ड लिटन ने शुरू किया था 18 से 82 ईसवी में लॉर्ड रिपन संपूर्ण भारत में नमक कर कम दिए।

18 सो 33 ईस्वी में लॉर्ड रिपन के कार्यकाल में अकाल संहिता बनाई गई तथा इल्बर्ट बिल आंदोलन के परिणाम स्वरूप ऑल इंडिया नेशनल कॉन्फ्रेंस की स्थापना की गई।

पंडित मदन मोहन मालवीय ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1909 के अधिवेशन में कहा था कि अपन भारतीय वायसराय में सबसे लोकप्रिय है।

लॉर्ड डफरिन (1884-88 ईस्वी)

लॉर्ड रिपन के पश्चात 1884 ईसवी में लॉर्ड डफरिन भारत का वायसराय बनकर आया लॉर्ड डफरिन ने अपने कार्यों में किसानों के हितों की रक्षा की ओर विशेष ध्यान दिया तथा तृतीय आंग्ल-बर्मा युद्ध 1885-88 ईसवी लॉर्ड डफरिन के कार्यकाल में हुआ तृतीय आंग्ल बर्मा युद्ध में बर्मा की हार हुई 1885 ईसवी में बंगाल में टेनेन्सी अधिनियम पारित हुआ।

टेनेंसी अधिनियम के अंतर्गत जमीदार अपनी इच्छा के अनुसार किसानों से भूमि को नहीं अथवा सकते थे लॉर्ड डफरिन के कार्यकाल में लेडी डफरिन फंड तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय की स्थापना 1887 ईसवी में की गई 1885 ईस्वी में ए ओ ह्यूम ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की थी ।

वायसराय लॉर्ड लैंसडाउन (1888-94)

1818 ईस्वी में लॉर्ड डफरिन के पश्चात प्रगतिशील विचारों वाले लॉर्ड लैंसडाउन ने भारत के वायसराय का पद संभाला इस के शासनकाल में कश्मीर के राजा प्रताप सिंह द्वारा राजगद्दी का परित्याग तथा प्रिंस ऑफ वेल्स का दूसरी बार भारत में आगमन तथा इसी के काल में 1891 ईसवी में द्वितीय फैक्ट्री अधिनियम पास हुआ। इस नई फैक्ट्री अधिनियम के अनुसार स्त्रियों के लिए कार्य करने के घंटे दिन में 11 सीमित कर दिए और बच्चों की कम से कम आयु 7 से 9 वर्ष निर्धारित कर दी तथा बच्चों के कार्य करने की 7 घंटे निर्धारित कर दिए बच्चों के लिए रात में कार्य करना पूर्ण रूप से अवैध घोषित कर दिया तथा कारखाना में काम करने वाले बच्चों के लिए 1 सप्ताह में एक अवकाश देने की व्यवस्था कर दी।

लॉर्ड लैंसडाउन के शासनकाल में 18 सो 92 ईस्वी में इंडियन काउंसिल एक्ट पारित हुआ इस एक्ट के अनुसार भारत में निर्वाचन का सिद्धांत शुरू हुआ और इसी के समय में सर डूरंड की अध्यक्षता में एक विशेष शिष्टमंडल अफगानिस्तान गया डूरंड के प्रयासों से भारत और अफगानिस्तान के बीच सीमा का निर्धारण किया गया जिसे आज डूरंड रेखा के नाम से जाना जाता है । मणिपुर में हुए एक विद्रोह को लैंसडाउन ने ही दबाया था लॉर्ड लैंसडाउन के काल में भारतीय रियासतों की सेनाओं को संगठित करके उन्हें साम्राज्य सेवा सेना का नया नाम प्रदान किया गया।

लॉर्ड एल्गिन द्वितीय (1894-99)

लॉर्ड लैंसडाउन के पश्चात 18 से 94 ईसवी में लॉर्ड एल्गिन तृतीय भारत का वायसराय नियुक्त किया गया। 1896 में तथा 1898 के बीच भारत के विभिन्न से जैसे मध्य उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिसार तथा बिहार आदि में भयंकर अकाल पड़ा 18 सो 98 ईस्वी में मकानों के संबंध में सर गेम्स नाइन की अध्यक्षता में एक अकाल आयुक्त नियुक्त किया गया। लॉर्ड एल्गिन के कार्यकाल में स्वामी विवेकानंद ने बेलूर में रामकृष्ण मिशन की तथा रामकृष्ण मठ की स्थापना की इसी समय में भारत सरकार को अफीम की उत्पत्ति की समस्या के संबंध में भी कदम उठाने पड़े 1893 ईस्वी में एक अफीम आयोग गठित किया गया अफीम आयोग का कार्य अफीम के प्रयोग से जनता के स्वास्थ्य पर प्रभाव के संबंध में गहन जांच करना तथा रिपोर्ट करना था मुंबई में 1894 ईस्वी में गिल्टी वाली एक भयंकर प्ले की बीमारी फैल गई इस बीमारी के कारण अत्यधिक जनहानि हुई इसी के चलते पुणे में चापेकर बंधुओं ने आयर्स्ट और रैंड नामक आग्रह अधिकारी की हत्या कर दी जिसके परिणाम स्वरूप क्या फिगर बंधुओं को फांसी की सजा सुनाई गई लॉर्ड एल्गिन ने भारत के विषय में कहा था कि भारत को तलवार के बल पर जीता गया है तथा तलवार के बल पर ही भारत की रक्षा की जाएगी”।

लॉर्ड कर्जन (1899-1905 ईस्वी)

लॉर्ड कर्जन जो पहले भारत का उपमंत्री था उसके बाद में उसे लॉर्ड एलगिन द्वितीय के स्थान पर भारत का गवर्नर जनरल बनाया गया लॉर्ड कर्जन ने 6 वर्ष भारत में बिताएं ।पीछे लॉर्ड कर्जन ने बहुत परिश्रम किया तथा अपने अधीनस्थ लोगों को भी परिश्रम के लिए प्रेरित किया भारत में वायसराय के रूप में लॉर्ड कर्जन का कार्यकाल काफी उथल-पुथल भरा रहा था कर्जन के कार्यकाल में हुए महत्वपूर्ण सुधार कार्य निम्नलिखित हैं।

लॉर्ड कर्जन की विदेश नीति- नोट का डीएनए अपने पद ग्रहण के साथ ही भारत के उत्तरी पूर्वी सीमांत से तुरंत ध्यान  की मांग उठने लगी लॉर्ड कर्जन फॉरवर्ड स्कूल का समर्थक था तेरी लॉर्ड कर्जन ने न तो फॉरवर्ड पॉलिसी को अपनाया और ना ही सिंध की ओर लोटो वाली नीति को अपनाया। लॉर्ड कर्जन ने मध्य मार्ग वाली नीति का अनुसरण किया तथा तिब्बत के गुरू दलाई लामा पर रूस की और  का आरोप लगाकर लॉर्ड कर्जन ने तिब्बत  ने हस्तक्षेप की नीति अपनाई 1903 ईस्वी में कर्नल यंग हसबैंड के नेतृत्व में गई सेना ने तिब्बतियों से संधि कर ली जिसके परिणाम स्वरूप तिब्बत ने दर से युद्ध  क्षतिपूर्ति देना स्वीकार किया परंतु जमानत के रूप में भारत सरकार ने भूटान एवं शिक्षण के बीच में एक चुंबी घाटी पर 75 वर्षों के लिए अपना अधिकार कर लिया

 भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम (1904)

लॉर्ड कर्जन ने अमरेली के अधीन 1902 में विश्वविद्यालयों में आवश्यक सुधार हेतु सुझाव देने के लिए एक आयोग का गठन किया गया इस आयोग के सदस्य की सिफारिश पर  भारतीय विश्वविद्यालय पास  

नौकरशाही ढांचे में सुधार कार्य लॉर्ड कर्जन के कार्यकाल में भारत में केंद्रीकरण की नीति चलाने में जिन समस्याओं का सामना किया उसमें से एक समस्या नौकरशाही ढांचे की संतोषजनक  व्यवस्था थी जो अपनी पुरानी हो चुकी थी तथा इन ढांचे की जड़ें बहुत मजबूत थी। लेटा तथा सूचना लिखने का कार्य इतना व्यापक था की एक-एक मामले को निपटाने में बहुत समय लगता था तो लॉर्ड कर्जन ने सभी विभागों को प्रेरित किया कर बेली की परामर्श द्वारा अपने कार्य को अपने सर पर निपटा दिया करें लंबे मामलों से बचकर टिप्पणी आदि लिखने की परंपरा  तथा शीघ्र निर्णय तक पहुंचने में होने वाले देर से बचें ।इससे व्यवस्था में शीघ्रता आई।

अकाल- लॉर्ड कर्जन ने स्वयं अकाल के समय भारत के संकटग्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया तथा प्रत्येक क्षेत्र में सहायता के लिए आदेश दिए मैकडोनाल्ड की अध्यक्षता में एक आयोग की नियुक्ति की गई जिसका कार्यकाल सहायता की व्यवस्था को कुशलता पूर्वक चलाने के संबंध में सिफारिशें प्रस्तुत करना था इस आयोग ने 1901 में अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी इस रिपोर्ट में इस बात पर जोड़ दिया गया के अकाल से निपटने की वास्तविक तैयारी में कमी रही है आयोग ने अकाल के पुनः न होने तथा शासन में बुराइयों को दूर करने के संबंध में कुछ सुधार करने के सुझाव दिए।

पुलिस सुधार

1902 मे सर एण्ड्रयू फ्रेजर की अध्यक्षता में पुलिस पुलिस आयोग की स्थापना की गई ताकि प्रत्येक प्रांत की पुलिस प्रशासन की जांच सही प्रकार से की जा सके कर्जन ने 1903 ईस्वी में पुलिस विभाग में सीआईडी (क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट) की स्थापना की।

कृषि व्यवस्था

लॉर्ड कर्जन के कार्यों में सबसे महत्वपूर्ण कार्य कृषि बैंकों की स्थापना तथा सहकारी समितियों का गठन किया गया जिससे किसानों को साहूकारों के शोषण से मुक्त किया जा सके 1981 ईस्वी में सहकारी ऋण समिति अधिनियम पारित हुआ सहकारी ऋण समिति अधिनियम के द्वारा नगरों तथा देहाती क्षेत्रों में सहकारी समितियों का गठन करने का सुझाव दिया गया लॉर्ड कर्जन ने बंगाल में पूजा के स्थान पर कृषि अनुसंधान संस्था की स्थापना की जिससे कृषि की मौलिक समस्याओं को हल करने में सहायता प्रदान की गई 1921 में भारत में सिंचाई की समस्या से निपटने के लिए एक आयोग का गठन किया गया इस आयोग का अध्यक्ष सर कॉलिन स्काॅट मॉन्क्रीफ था 1981 ईस्वी में सहकारी ऋण समिति अधिनियम पास हुआ जिसमें कम ब्याज पर उधार देने की व्यवस्था की गई इसके अलावा साम्राज्य कृषि विभाग स्थापित किया गया जिसमें कृषि एवं पशु  पालन के लिए वैज्ञानिक प्रणाली को प्रयोग करने का प्रोत्साहन दिया गया।

 रेलवे में लॉर्ड कर्जन के सुधार

 भारत में रेलों की कार्य पद्धति के संबंध में रिपोर्ट तैयार करने के लिए सर थॉमस रॉबर्टसन को नियुक्त किया गया उसने संपूर्ण पद्धति को पूर्ण परिवर्तन की सिफारिश की थी और थॉमस रॉबर्टसन ने वाणिज्य उपक्रम के आधार पर रेल लाइनों के विकास पर जोड़ दिया

कोलकाता निगम की स्थापना

लॉर्ड कर्जन के शासनकाल में कोलकाता में निगम की स्थापना की गई और बंगाल व्यवस्थापिका सभा के सामने कोलकाता कॉरपोरेशन में संशोधन करने का एक बिल पास किया गया इस बिल का मकसद कोलकाता निगम के अधिकारों को कम करना तथा कार्यकारिणी को कलकत्ता निगम से ज्यादा अधिकार प्रदान करना था लॉर्ड कर्जन ने कोलकाता निगम अधिनियम 1899 के द्वारा चयनित सदस्यों की संख्या कमी की परंतु निगम एवं उसकी समितियों में अंग्रेज अधिकारियों की संख्या में वृद्धि कर दी गई इसका परिणाम यह निकला कि कोलकाता नगर निगम मात्रिक एंग्लो इंडियन सभा के रूप में ही रह गया।

सन 1900 ईसवी में लॉर्ड किचनर  भारत का भारत का सेना अध्यक्ष यू कराया था यह है बहुत महत्वाकांक्षी सेनाध्यक्ष था किसने देशी राजाओं की राजकुमारों को सैनिकों के लिए इंपीरियल कैडेट कोर की स्थापना लार्ड किचनर से किसी विवाद के कारण सन 1905 ईसवी में लॉर्ड कर्जन ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया।

बंगाल विभाजन

 लॉर्ड कर्जन के कार्यकाल में बंगाल का विभाजन हुआ इस विभाजन का विरोध करने के लिए एक राष्ट्रीय आंदोलन हुआ इस आंदोलन को दबाने के उद्देश्य से लॉर्ड कर्जन ने उन्नीस सौ 5 ईसवी में बंगाल को दो भागों में बांट दिया पूर्वी बंगाल तथा असम का एक नया प्रांत बनाया गया जिसमें पुराने बंगाल के 15 जिलों को असम तथा चटगांव को मिला दिया गया ।

लॉर्ड कर्जन ने बंगाल का विभाजन फूट डालो और राज करो की नीति के आधार पर किया था और इस कार्य के द्वारा हिंदू और मुसलमानों में फूट डालने का प्रयास किया गया परंतु इस विभाजन के विरोध में इतनी आवाजें उठी कि 1911 ईस्वी में बंगाल विभाजन को समाप्त करने की घोषणा कर दी गई और 1912 ईस्वी में बंगाल का विभाजन पूर्णत समाप्त हो गया।

लॉर्ड मिंटो द्वितीय (1905 से 1910)

लॉर्ड मिंटो द्वितीय लार्ड कर्जन के बाद भारत का वायसराय बना लॉर्ड मिंटो द्वितीय के कार्यकाल में एक महत्वपूर्ण घटना 1960 ईस्वी में हुई हुए घटना आंग्ल रूसी प्रतिनिधि सम्मेलन था। इस सम्मेलन के द्वारा रूस और इंग्लैंड के बीच सभी मतभेद समझा दिए गए तथा दोनों देश एक दूसरे के निकट आ गए 1909 ईस्वी में इंडियन काउंसिल अधिनियम पास हुआ इस अधिनियम से विधानसभाओं के गैर सरकारी सदस्यों की संख्या में वृद्धि हो गई और उनके अधिकार भी बढ़ा दिए गए।

  • 1906 ई में मुस्लिम लीग का गठन किया गया
  • कोलकाता अधिवेशन में कांग्रेस द्वारा अपना लक्ष्य स्वराज्य घोषित किया गया
  • लॉर्ड मिंटो द्वितीय के शासनकाल में खुदीराम बोस को फांसी दी गई और बाल गंगाधर तिलक को 6 वर्ष का कठोर कारावास दिया गया
  • इसी के शासनकाल में समाचार पत्र अधिनियम 1908 पारित हुआ।
  • चीन के साथ अफीम का व्यापार पर प्रतिबंध लगाया गया
  • मदन लाल धींगरा द्वारा लंदन में जुलाई 1909 में कर्जन वायली की गोली मारकर हत्या कर दी गई

लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय का कार्यकाल

लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय 1910 ईस्वी में भारत का वायसराय बना। 1910 ईस्वी में वायसराय बनने के बाद 1911 में जॉर्ज पंचम ने भारत की यात्रा की और दिल्ली में उसी समय एक विशाल दरबार का आयोजन किया गया 12 दिसंबर 1911 ईस्वी में दिल्ली दरबार का आयोजन हुआ था।

दिल्ली दरबार के अवसर पर जॉर्ज पंचम ने घोषणा की भारत की राजधानी को कोलकाता दिल्ली स्थानांतरित किया जाएगा असम का शासन शासन पृथक रूप से एक मुख्य आयुक्त के अधीन कर दिया तथा 23 दिसंबर 1912 को दिल्ली में आधिकारिक रूप से प्रवेश  करते समय लॉर्ड हार्डिंग पर पर बम फेंका गया जिसमें लॉर्ड हार्डिंग बुरी तरह घायल हो गया।

लॉर्ड हार्डिंग के समय की मुख्य घटनाएं

  •  1913 ईस्वी में रविंद्र नाथ टैगोर को नोबेल पुरस्कार तथा रोहित मेहता ने मुंबई में क्रॉनिकल एवं गणेश शंकर विद्यार्थी ने प्रताप नामक पत्रिका का प्रारंभ किया
  • ब्रिटिश शासन द्वारा शैक्षिक सुधार संबंधी प्रस्ताव पारित किए गए।
  •  4 अगस्त 1914 को प्रथम विश्व युद्ध प्रारंभ हुआ
  • 1915 में गांधी जी भारत वापस आए और साबरमती में आश्रम की स्थापना की और चंपारण सत्याग्रह शुरू किया
  •  1916 ईस्वी में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच लखनऊ में समझौता हुआ
  • लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का कुलाधिपति 1916 में नियुक्त किया गया

लॉर्ड चेम्सफोर्ड (1916 से 1921)

 प्रथम विश्व युद्ध के दौरान लॉर्ड चेम्सफोर्ड भारत में गवर्नर जनरल गवर्नर जनरल बनकर भारत आया, भारत में आने से पूर्व ऑस्ट्रेलिया के 1 राज्य में कार्य कर चुका था।

महत्वपूर्ण घटनाएं

  • चेम्सफोर्ड के कार्यकाल के  श्रीमती एनी बेसेंट एवं बाल गंगाधर तिलक ने 1916 में होमरूल लीग का गठन किया। तथा पूना में महिला विश्वविद्यालय की स्थापना की थी ।
  • 1917 में सैडलर आयोग का गठन किया गया।
  • रोलेट एक्ट 1919 में पारित किया गया।
  • 13 अप्रैल 1919 को प्रसिद्ध जलियांवाला हत्याकांड हुआ।
  • 1919 में मोंटेग्यू चेम्सफोर्ड सुधार अधिनियम अर्थात भारत सरकार अधिनियम पारित किया गया।
  • 1920 21 में गांधी जी ने खिलाफत आंदोलन और सत्याग्रह की शुरुआत की।
  • तृतीय अफगान युद्ध मोंटेग्यू चेम्सफोर्ड के समय हुआ था।
  • ब्रिटिश संसद की सदस्यता प्राप्त करने वाले प्रथम भारतीय दादा भाई नौरोजी तथा दूसरे एस पी सिन्हा थे।
  • एस पी सिन्हा बिहार के लेफ्टिनेंट गवर्नर बने और इस पद पर वे पहले भारतीय थे।

लॉर्ड रीडिंग 1921 26 ईसवी

 नॉट रीडिंग का जन्म एक साधारण गृहस्थ परिवार में हुआ था परंतु अपनी योग्यता कुशलता और परिश्रम शिव है इंग्लैंड के मुख्य न्यायाधीश के उच्च पद पर पहुंच गया था। मुडीमैन समिति की रिपोर्ट को रीडिंग के कार्यकाल में सार्वजनिक किया गया।

 महत्वपूर्ण घटनाएं-

  •  नॉट रीडिंग के समय चौरी चौरा घटना तथा गांधी जी द्वारा पहला असहयोग आंदोलन समाप्त किया गया।
  • नवंबर 1921 में प्रिंस ऑफ वेल्स की भारत यात्रा।
  •  1921 में एमएन राय द्वारा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की गई।
  • 1921मे ही  केरल का मोपला विद्रोह हुआ था।
  • 1922 ईस्वी में विश्व भारती विश्वविद्यालय ने कार्य आरंभ किया।
  • सी आर दास(देशबंधु) और मोतीलाल नेहरू द्वारा दिसंबर 1922 में स्वराज पार्टी का गठन किया गया।
  •  प्रशासनिक सेवाओं में उम्मीदवारों के चयन हेतु दिल्ली और लंदन में 1923 ईस्वी में एक साथ परीक्षा की व्यवस्था की गई थी।
  •  9 अगस्त 1923  को काकोरी कांड हुआ था।
  •  दिसंबर 1925 में आर्य समाज के नेता स्वामी श्रद्धानंद की हत्या कर दी गई।

 लॉर्ड इरविन 1926 31

1926 में लार्ड इरविन भारत का वायसराय बनकर आया था 8 नवंबर 1927 को ब्रिटेन में साइमन कमीशन की नियुक्ति की गई तथा इनके कार्यकाल में 1928 ईस्वी में साइमन कमीशन भारत आया इसमें एक भी सदस्य भारतीय नहीं होने के कारण भारत में इसका विरोध किया गया संपूर्ण देश में हड़ताल की गई तथा साइमन कमीशन का बहिष्कार किया गया दिसंबर 1928 में कोलकाता के अधिवेशन में कांग्रेस ने एक प्रस्ताव स्वीकृत किया जिसने ब्रिटिश सरकार से मांग की गई थी 1 वर्ष के भीतर औपनिवेशिक स्वराज्य प्रदान किया जाए साइमन कमीशन का बहिष्कार करते समय लाला लाजपत राय जी घायल हुए थे जिसके बाद में उनकी मृत्यु हो गई।

 लखनऊ में 1928 ईस्वी में एक सर्वदलीय सम्मेलन का आयोजन किया गया तथा मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में एक समिति का गठन हुआ इस समिति की रिपोर्ट को नेहरू रिपोर्ट के नाम से जाना जाता है मेरी रिपोर्ट के विरोध में 1929 ईस्वी में जिन्ना ने अपनी 14 सूत्रीय मांग प्रस्तुत की भगत सिंह एवं बटुकेश्वर दत्त द्वारा 8 अप्रैल 1929 को केंद्रीय धारा सभा दिल्ली में बैंकों पर बम फेंका गया जब वहां जनविरोधी पब्लिक सेफ्टी बिल पर चर्चा हो रही थी 1929 में ईद प्रसिद्ध लाहौर षड्यंत्र एवं जतिन दास की 64 दिन की भूख हड़ताल के बाद कारावास में ही मृत्यु हो गई।

 महत्वपूर्ण घटनाएं-

  •  1928 में कृषि से संबंधित रॉयल कमीशन की नियुक्ति की गई।
  • 1929 में इंपीरियल काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च की स्थापना की गई।
  • 1929 में लॉर्ड इरविन द्वारा दीपावली की घोषणा की गई।
  • 26 जनवरी 1930 को संपूर्ण देश में स्वतंत्रता दिवस का आयोजन किया गया।
  • साइमन कमीशन की रिपोर्ट पर विचार करने के लिए लंदन में प्रथम गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया गया।
  • 12 मार्च 1930 को गांधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया।
  •  5 March 1931 को गांधीजी और इरविन के मध्य गांधी इरविन समझौता पर हस्ताक्षर हुए जिसके बाद गांधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को समाप्त कर दिया।

लॉर्ड बिलिंगटन 1931 36

  लोड बिलिंग अटेंड भारत का वायसराय बनने से पहले मुंबई तथा मद्रास थे गवर्नर के रूप में कार्य कर चुका था इस के कार्यकाल में 1 सितंबर से 1 दिसंबर 1931 तक द्वितीय गोलमेज सम्मेलन का आयोजन लंदन में किया गया इस गोलमेज सम्मेलन में गांधी जी ने कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया परंतु सांप्रदायिक समस्या के कारण इसमें कोई समझौता नहीं हो सका अगस्त 1932 में रेंज मैकडोनाल्ड ने प्रसिद्ध सांप्रदायिक पंचाट की घोषणा घोषणा कर दी और पुणे की यरवदा जेल में बंद महात्मा गांधी ने इस सांप्रदायिक पंचाट का विरोध किया किसी विरोध के फलस्वरूप पूना समझौते पर हस्ताक्षर हुए इस समझौते के तहत दलित जातियों के प्रश्न पर सांप्रदायिक निर्णय में परिवर्तन कर दिया गया

 महत्वपूर्ण घटनाएं

  •  दिसंबर 1932 में लंदन में द्वितीय गोलमेज सम्मेलन का आयोजन हुआ।
  •  इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून की स्थापना 1932 में की गई।
  • 1933 में कैंब्रिज विश्वविद्यालय के छात्र चौधरी रहमत अली ने पहली बार पाकिस्तान शब्द का प्रयोग किया।
  • भारत सरकार अधिनियम 1935 ने स्वीकार किया गया।
  • संपूर्ण भारत किसान सभा की स्थापना 1936 में की गई।
  • बिहार तथा क्वेटा में भूकंप आने से अपार जन धन की हानि हुई।
  •  जनवरी 1936 को जॉर्ज पंचम का निधन तथा एडवर्ड आठवाॅ का राज्याभिषेक हुआ।
  • 1935 में भारत से बर्मा पृथक हुआ।

लॉर्ड लिनलिथगो 1936-44 ई.

1936 मे लॉर्ड लिनलिथगो  भारत का गवर्नर जनरल बना भारत सरकार 1935 के अधिनियम का ढांचा बनाने में लॉर्ड लिनलिथगो का महत्वपूर्ण योगदान रहा  उसे कानून  का क्रियान्वयन करने के लिए भारत का वायसराय बना कर दिया गया था 1935 के अधिनियम के अंतर्गत पहला आम चुनाव 1936-37 ईसवी में हुआ।

 इस पहले चुनाव में कांग्रेश को 6 प्रांतों में पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ तथा दो अन्य प्रांतों में समर्थक गुटों द्वारा सरकार बनाई गई।

1 सितंबर 1 सितंबर 1939 को द्वितीय विश्व युद्ध प्रारंभ हुआ इस युद्ध में भारतीयों का सक्रिय सहयोग प्राप्त करने के लिए  लॉर्ड लिनलिथगो ने भारतीय नेताओं के समक्ष अगस्त प्रस्ताव 8 अगस्त 1940 को प्रस्तुत किया इस प्रस्ताव में भारतीयों को प्रलोभन देने वाले अनेक प्रस्ताव रखे गए थे। 

 महत्वपूर्ण घटनाएं

  • 1 सितंबर 1939 को द्वितीय विश्व युद्ध का प्रारंभ
  • 1938 तथा 1939 ईस्वी में सुभाष चंद्र बोस कांग्रेश के प्रधान निर्वाचित हुए तथा सुभाष चंद्र बोस और गांधी जी व उनके अनुयायियों के मध्य मतभेद उत्पन्न हो गया अंत में सुभाष चंद्र बोस ने कांग्रेस छोड़ दी और फॉरवर्ड ब्लॉक का गठन किया।
  • 1937 ग्राम फैजपुर, बंगाल में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ जिसके अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू थे।
  • 1938 ईस्वी में वी डी सावरकर हिंदू महासभा के अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
  • भारतीयों को द्वितीय विश्व युद्ध में सम्मिलित किए जाने के परिणाम स्वरुप कांग्रेसी मंत्रिमंडल ने 22 दिसंबर 1939 को  त्यागपत्र दे दिया।
  • 22 दिसंबर 1939 को मुस्लिम लीग ने मुक्ति दिवस के रूप में मनाया।
  • 17 अक्टूबर 1946 को गांधी जी द्वारा पवनार आश्रम से व्यक्तिगत सत्याग्रह का आरंभ किया गया।
  • लॉर्ड लिनलिथगो  के कार्यकाल में 1946 में पहली बार पाकिस्तान की मांग की गई।
  • 1942 में भारत में क्रिप्स मिशन आया।
  •  14 जुलाई 1942 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की कार्यकारिणी समिति द्वारा भारत छोड़ो आंदोलन प्रस्ताव को पारित किया।
  • 1943 में सिंगापुर में आजाद हिंद फौज का गठन किया गया।
  •  1943 में बंगाल में  भयंकर अकाल पड़ा।

  लॉर्ड वेवेल (1944-47)

 लॉर्ड लार्ड वेवेल के काल में द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुआ काका विश्व युद्ध में जर्मनी की हार हुई तथा जापान ने घुटने टेक दिए शिमला सम्मेलन 25 जून 1945 को बेल द्वारा आयोजित किया गया परंतु जिन्ना की हठधर्मिता के कारण शिमला सम्मेलन  विफल रहा।

लॉर्ड वेवेल के काल में ही मजदूर दल इंग्लैंड में सत्ता में आया और इधर भारत में भी प्रांतीय विधानसभाओं के लिए नए चुनाव कराने की आज्ञा दी गई।

मार्च 1946 में एक मंत्रिमंडल का दल इस दल में लाॅर्ड पैथिक लोरेंस  सर स्टैनफोर्ड क्रिप्स और ए वी  एलेग्जेंडर शामिल थे।  इस योजना के अनुसार भारत में अंतरिम सरकार की व्यवस्था की गई तथा भारत का संविधान बनाने के लिए कार्य प्रणाली पर विचार किया गया।

 महत्वपूर्ण घटनाएं

  • लीवर सरकार 1945 में सत्ता में आई जिस के प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली थे।
  • नवंबर 1945 में आजाद हिंद  फौजी के सैनिकों पर लाल किले में मुकदमा चलाया गया।
  •  18 फरवरी 1946 ईस्वी में मुंबई में नौसेना द्वारा विद्रोह किया गया।
  •  2 सितंबर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अंतरिम सरकार बनाई।
  • 16 अगस्त 1946 को मुस्लिम लीग द्वारा सीधी कार्यवाही दिवस का आयोजन किया गया।
  •  ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने जून 1948 से पहले भारत को स्वतंत्र करने  घोषणा की।

 लॉर्ड माउंटबेटन 1947 48

लॉर्ड माउंटबेटन ने मार्च 1947 में लॉर्ड वेवेल के स्थान पर वायसराय का कार्यभार संभाला और 3 जून 1943 को माउंटबेटन योजना अर्थात भारत विभाजन की योजना की घोषणा की गई जिसके तहत भारत को दो भागों में विभाजित कर पाकिस्तान और भारत में बांटना था 4 जुलाई 1947 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली द्वारा भारतीय स्वतंत्रता विधेयक ब्रिटिश संसद में प्रस्तुत किया गया और 18 जुलाई 1947 को ब्रिटिश संसद ने इस विधेयक को पास कर दिया भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र राष्ट्र के निर्माण की घोषणा हो गई 14 अगस्त 1947 पाकिस्तान तथा 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ स्वतंत्रता के बाद लॉर्ड माउंटबेटन स्वतंत्र भारत का प्रथम गवर्नर जनरल बनाया गया।

 सी राजगोपालाचारी 1948 50

 जून 1948 से जनवरी 1950 तक सी राजगोपालाचारी भारत के गवर्नर जनरल रहे तथा यह प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल थे उनके शासनकाल में 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा भारत का संविधान स्वीकृत किया गया तथा 26 जनवरी 1950 को इस संविधान को संपूर्ण देश में लागू किया गया सी राजगोपालाचारी भारत के अंतिम भारतीय गवर्नर जनरल थे ।

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